Sunday, 14 October 2012

सुर-क्षेत्र में "सुर" गया तेल लेने ...


जकल छोटे पर्दे पर दर्शकों को अपनी ओर खींचने के लिए ऐसी गलाकाट प्रतियोगिता शुरू हो गई है, जिसे कभी जायज नहीं ठहराया जा सकता। एक मनोरंजक चैनल ने तो छोटे पर्दे को क्रिकेट का मैदान ही बना दिया है। वजह आप सबको पता है, क्रिकेट मैच के दौरान बाजार सूने हो जाते हैं, स्कूल कालेज में छात्रों की संख्या काफी कम रह जाती है, सरकारी दफ्तर तक वीरान नजर आने लगते हैं, क्योंकि सभी लोग टीवी के सामने जम जाते हैं। सब अपने दुश्मन देश को हारता हुआ देखना चाहते हैं। अब देखिए ना दावा तो ये किया जाता है कि सांस्कृतिक गतिविधियों के आदान प्रदान से भारत और पाकिस्तान की आवाम करीब आएगी, लेकिन गायन प्रतियोगिता के मंच सुर-क्षेत्र से तो आवाम कभी करीब आ ही नहीं सकती। सच ये है कि ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों में सौहार्द के बजाए जहर घोलने का काम कर रहे हैं। इस प्रोग्राम का जो फारमेट तैयार किया गया है वो लोगों के सेंटीमेंट को भड़काने वाला है।

आइये पहले इसके फारमेट पर ही चर्चा कर लेते हैं। इसमें भारत और पाकिस्तानी गायकों की टीम है और इस टीम अलग अलग कप्तान हैं। पाकिस्तानी गायकों का कप्तान वहां के संगीतकार, अभिनेता व गायक आतिफ असलम को बनाया गया है जबकि भारतीय गायकों के कप्तानी हिमेश रेशमियां निभा रहे हैं। ये दोनों इस शो में शुरुआती जहर घोलते हैं। उसके बाद इस जहर को और तीखा बनाने के काम को अंजाम देती है जजों की पैनल। जिसमें शामिल हैं पाकिस्तानी गायिका आबिदा परवीन, बांग्लादेशी  गायिका रुना लैला और भारतीय पार्श्वगायिका आशा भोसले।

मैं आज ही इस प्रतियोगिता के परिणामों का हश्र बता देता हूं। होगा ये कि इसके बाद दोनों देशों में गाने को लेकर इतना विवाद बढ जाएगा कि कलाकार जो आज एक दूसरे के देशों मे जाते हैं और फिल्मों के साथ ही स्टेज शो करके लोगों का दिल जीतते हैं। आने वाले दिनों में ये प्रक्रिया थम जाएगी। पाकिस्तानी कलाकार यहां नफरत की नजर से देखे जाएंगे और भारतीय गायकों वहां जिल्लत का सामना करना पडेगा। इस शो का मकसद अगर भाईचार  बढ़ाना होता तो पाकिस्तानी गायकों का कप्तान हिमेश को बनाया जाता और भारतीय गायकों का कप्तान आतिफ को बनाया जाना चाहिए था। ऐसे में जब पाकिस्तान के आतिफ  अगर भारतीय गायकों का और हिमेश पाकिस्तानी गायकों का पक्ष लेते नजर आते तो एक बार जरूर देश में सकारात्मक संदेश जाता।

मैं पाकिस्तानी गायिका आबिदा परवीन को सुनता हूं, उनकी गायकी मुझे पसंद है। अब आप  ये मत पूछ लीजिएगा कि कौन सा सुर पसंद है। सच कहूं तो मुझे  सुर - उर की कोई  जानकारी नहीं है, लेकिन तीनों जज यानि आशा भोसले, आबिदा परवीन और रुना लैला को तो सुर की जानकारी होगी ना। अब ऐसा कैसे हो सकता है कि एक  प्रतियोगी गाना गाए उसमें एक जज का फैसला आए कि गाना सुर में था और दूसरा उसी गाने को बेसुरा बता दे। ऐसे  में इतना तो तय है कि या तो एक जज को सुर का ज्ञान नहीं है, या फिर वो जाति, धर्म, भाषा, देश के आधार पर भेदभाव कर रहा है।

मैं आज यानि (14 अक्टूबर) की बात करूं। दिन में सुर क्षेत्र देख रहा था।  एक पाकिस्तानी गायक को आशा भोसले और बांग्लादेशी गायक रुना लैला दोनों  ने " जीरो " मार्क्स दिए। दोनों ने अपने कमेंट में साफ किया कि गाना सुर में नहीं था, चूंकि प्रतियोगिता का नाम ही सुर क्षेत्र है, लिहाजा सुर से तो किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। लेकिन आबिदा परवीन ने उसे पूरे 10 मार्क्स दे दिए। अब सवाल उठता है कि गाना या तो सुर में था या नहीं था। अगर आशा भोसले और रुना लैला को गाना बेसुरा लगा तो आबिदा को गाने में सुर कहां से नजर आ गया? किसी को भी ये बात समझने में देर नहीं लगी कि गायक प्रतियोगी उनके  मुल्क का है। ऐसे में सुर गया तेल लेने। आबिदा ने उसे पूरे 10 नंबर दे दिए, हालाकि इस पर सवाल भी उठा, तो उन्होंने कहा कि माइक की गड़बड़ी से ऐसा हो सकता है कि उसका सुर गया हो, लेकिन पाकिस्तानी गायक ने बढिया गाया। आशा भोसले की आपत्ति को भी उन्होंने यही कह कर खारिज कर दिया।

दरअसल इस शो का  फार्मेट ऐसा है कि इसमें गायकी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है, हर शो में इंडिया या पाकिस्तान का जो विजेता होता है, उसे ट्राफी दी जाती है। देखने से ही लगता है इस शो का मकसद कुछ और नहीं बल्कि इंडिया और पाकिस्तान के नाम पर ज्यादा से ज्यादा दर्शक (यानि टीआरपी) इकट्ठा करना है। सच बताऊं तो जब भी प्रतियोगी गाने के लिए आता है तो दर्शकों को लगता है कि कितनी  जल्दी ये गाना बंद करे, जिससे वे कैप्टन और जजों की नूरा कुश्ती सुन सकें। आतिफ और हिमेश जिस अंदाज मैं बैठते हैं, लगता है कि ये कब एक दूसरे का कालर पकड़ लेगें। ना आपस में कोई संवाद, ना चेहरे पर कोई भाव, दोनों एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन कर यहां बैठते हैं। फिर कहा जाता है कि हम पाकिस्तान  के साथ सांस्कृतिक आदान प्रदान कर रहे हैं।

मुझे नहीं पता कि ये पाकिस्तानी कैप्टन आतिफ अपने मुल्क का कितना बड़ा कलाकार है, गायक है, अभिनेता है, मैं तो इसी सुर क्षेत्र के मंच पर इन्हें देख रहा हूं। हैरानी तब  होती  जब ये आशा भोसले के जजमेंट पर उंगली उठाता है और उसका लहजा भी सड़क छाप लफंगे जैसा होता है। बेचारी आशा भोसले को ये कहना  पड़ता है कि " शायद मैं इस जज की कुर्सी के काबिल नहीं हूं " । कई बार तो ऐसी बेहूदा बातें की जाती हैं, जिससे आशा ताई का चेहरा रुंआसा हो जाता है। कैप्टन आतिफ ने एक शो में जब हर जजमेंट पर उंगली उठाना शुरू  किया तो आशा ताई को कहना पड़ा कि " गाने के मामले में मैं मर भी जाऊं तो झूठ नहीं बोल सकती "। आपको पता है कि आशा ताई तब से फिल्मों में और देश विदेश में गा रही हैं, जब आतिफ पैदा भी नहीं हुआ होगा। आतिफ की उम्र 40- 45 साल के करीब है और आशा ताई को गाना गाते हुए 40- 45 साल हो गए। इसके बाद भी आतिफ का व्यवहार आपत्तिजनक है।

कुरुक्षेत्र बन चुका सुर-क्षेत्र आने वाले समय में भारत और पाकिस्तान के बीच खाई को और चौड़ा करने वाला है। जिस तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच इन दिनों क्रिकेट के  मैच बंद है, सुर क्षेत्र में इसी तरह का माहौल रहा तो कलाकारों का भी एक  दूसरे के देश में जाना जल्दी बंद हो जाएगा। भारत और पाकिस्तान के बीच जमीनी सरहदों को ख़त्म करने का ये प्रयास यूं ही दम तोड़ देगा। ऐसे में जल्दी ही इसका फार्मेट बदलकर ऐसा किया जाना चाहिए,  जिससे कम से कम शो से भाईचारे का संदेश तो लोगो में जाए ही। शो के स्टेज  पर दोनों देशों के बीच हर जगह दूरी बनाने की बात है। अब  देखिए गायक मंच  पर आते हैं तो अपने अपने देश के स्टैड से माइक उठाते हैं, माइक भी वो एक जगह से नहीं लेते हैं। सुरक्षेत्र के माइक से आग निकलता रहता  है, इसका मतलब तो मुझे आज तक समझ में नहीं आया।

सुर-क्षेत्र को जीरो मार्क्स...

इस शो की  रेटिंग अगर मुझे करनी हो तो मैं इसे जीरो मार्क्स दूंगा। जीरो देने की वजह है। दरअसल इस शो में ही ऐसा है कि या तो कलाकार सुर में गाता है, या फिर बेसुरा है। मतलब या तो उसे जज पूरे 10 नंबर  देते हैं या फिर जीरो। ये कैसा न्याय है, अगर किसी ने मामूली गल्ती की है तो एक मार्क्स काट कर उसे 9 दिया जाना चाहिए। पर यहां ऐसा नहीं है। प्रतियोगी को या तो 10 मार्क्स मिलते हैं या फिर जीरो। ऐसे में अगर मुझे इस शो को मार्क्स देने हों तो बिना सोचे समझे मैं भी जीरो दे दूंगा।


37 comments:

  1. महेन्द्र जी ,मैंने भी ये शो आज ही देखा है और मैं आपकी बात से ,रेटिंग से शतप्रतिशत सहमत हूँ .....:-(

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  2. "मतलब या तो उसे जज पूरे 10 नंबर देते हैं या फिर जीरो। ये कैसा न्याय है, अगर किसी ने मामूली गल्ती की है तो एक मार्क्स काट कर उसे 9 दिया जाना चाहिए। पर यहां ऐसा नहीं है। प्रतियोगी को या तो 10 मार्क्स मिलते हैं या फिर जीरो। ऐसे में अगर मुझे इस शो को मार्क्स देने हों तो बिना सोचे समझे मैं भी जीरो दे दूंगा।" bilkul sahi kaha aapne

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  3. मैं भी देखती हूँ ये शो, आप की बातो से पूर्ण सहमत हूँ

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  4. बहुत बढ़िया विश्लेषण ||
    बधाई भाई जी ||

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  5. is show ke bare me suna jaroor tha..ab padh kar lagta hai ..mein kitana samjhdari ka kam karti hu ki ye show nahi dekhti...badiya vishleshan abhar..

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    1. हाहाहाहा
      वैसे देख तो लीजिएगा ही..

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  6. आपने आज ये बात कही
    मैं ये बात बहुत दिन से कह रहा हूँ
    इस कार्यक्रम का फार्मेट एकदम बेहूदा और बकवास है !
    ये कार्यक्रम सिर्फ खुन्नसबाजी को ही बढ़ावा देगा !

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  7. वाह!
    आपकी इस ख़ूबसूरत प्रविष्टि को कल दिनांक 15-10-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-1033 पर लिंक किया जा रहा है। सादर सूचनार्थ

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    1. शुक्रिया बहुत बहुत शुक्रिया

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  8. "मुझे नहीं पता कि ये पाकिस्तानी कैप्टन आतिफ अपने मुल्क का कितना बड़ा कलाकार है, गायक है, अभिनेता है, मैं तो इसी सुर क्षेत्र के मंच पर इन्हें देख रहा हूं। हैरानी तब होती जब ये आशा भोसले के जजमेंट पर उंगली उठाता है और उसका लहजा भी सड़क छाप लफंगे जैसा होता है"

    आलोचना का लहज़ा तो ज़नाबे आला आपका भी माशा अल्लाह ही है .क़ानून मंत्री जी की तरह तैश में क्यों आ जातें हैं आप .कैसी भाषा लिख रहें हैं आप और रही बात ज़जों में मत विभाजन की मत वैभिन्न्य की तो ज़नाब यह संगीत है यहाँ सब मिलके किसी नेता की जय बोलने नहीं आये हैं .

    "आपको पता है कि आशा ताई तब से फिल्मों में और देश विदेश में गा रही हैं, जब आतिफ पैदा भी नहीं हुआ होगा। आतिफ की उम्र 40- 45 साल के करीब है और आशा ताई को गाना गाते हुए 40- 45 साल हो गए। इसके बाद भी आतिफ का व्यवहार आपत्तिजनक है।"

    महेंद्र भाई ज़बान संभाल के आप क़ानून मंत्री की भाषा बोल रहें हैं .

    " अब देखिए गायक मंच पर आते हैं तो अपने अपने देश के स्टैड से माइक उठाते हैं, माइक भी वो एक जगह से नहीं लेते हैं। सुरक्षेत्र के माइक से आग निकलता रहता है, इसका मतलब तो मुझे आज तक समझ में नहीं आया।"

    हाँ भाई साहब बड़े बड़े गवैये अपने माइक साथ लाते हैं पूरा साउंड सिस्टम भी साजिन्दे भी .स्टैंड शब्द कृपया शुद्ध कर लें .आभार .

    _______________
    लिंक 21-
    सुर-क्षेत्र में "सुर" गया तेल लेने -महेन्द्र श्रीवास्तव
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    1. पहले तो आप खुद अपने कमेंट की भाषा देख लें, फिर भाषा और संस्कृत के लंबरदार बनने की कोशिश कीजिए।
      अभी भी मेरे स्पैम बाक्स में पचासों कमेंट आपके हैं, जिसमें आपने मर्यादा की सारी सीमाएं तोड़ रखी हैं। फिर भी आप कोई मेरे या देश के रोल माडल तो हैं नहीं कि उससे मुझे गुरेज हो।
      हां मैने आतिफ के लिए जो कुछ भी लिखा है, वो गल्ती से नहीं बिल्कुल जानबूझ कर लिखा है, क्योंकि आशा ताई के मुकाबले उनकी कोई हैसियत नहीं है. और वो उनसे जिस अंदाज में बात करता है, उससे इसी भाषा में बात करना उचित है।
      मुझे अपने लिखे पर कोई ग्लानि नहीं है, चाहे आप इसे सलमान की भाषा कहें या फिर आपके अग्रज अरविंद की

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  9. आपकी इस बात से शत-प्रतिशत सहमत हूँ !
    जब से इस शो के एड आने शुरू हुए थे, तभी से लग रहा था कि ये शो है या जंग का मैदान ! और तो और...ऐसे शो में ऐसे महान कलाकारों ने शूटिंग के दौरान कोई आपत्ति क्यों नहीं उठाई ? मुझे तो उसके एड देखकर ही चिढ़ हो रही थी और ये समझ नहीं आ रहा था...इसको टेलीकास्ट करने की अनुमति कैसे मिली ! कला के लिए कोई धर्म ,जाति भेदभाव नहीं होता ! जब हम जैसे साधारण लोग इस बात को समझते हैं, तो इतने बड़े दिग्गज कलाकार अपनी भूमिका किस तरह भूल गये...! Anchors' (Atif & Himesh) Body Language is so irritating...that, though I love listening to good music But I don't feel like watching this show !

    आपके इस ब्लॉग में हमने पहली बार ही जब comment किया था, तो Talent Shows की बात करते वक़्त, ये बात हमारे दिमाग़ थी. I really hate such stupid instigating shows ! इन्हें जोड़ने का काम करना चाहिए..न कि तोड़ने का....
    ~सादर !

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  10. मैंने ये एपिसोड देखा है,और इसका फारमेट ही गलत है,कम से कम शो के माध्यम से भाईचारे का संदेश तो लोगो में जाए,,,,
    महेंद्र जी,आपकी बातों से मै पूरी तरह सहमत हूँ,,,,,

    RECENT POST ...: यादों की ओढ़नी

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  11. एक ब्लोगिया विमर्श यह भी
    विषय वस्तु :
    MONDAY, OCTOBER 15, 2012


    आईने पर कुछ तरस तो खाइए! : सोमवारीय चर्चामंच-1033
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/

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    1. क्या लिंक दिया है आपने, इसमें है क्या ?
      मैने देखा नहीं है, पर आपसे खुराफात से अधिक की मैं उम्मीद ही नहीं कर सकता। समय खराब करने का कोई मतलब नहीं।

      मित्रों आप सबको भी यही सलाह है कि वक्त जाया करना होगा, वैसे भी जनाब क्या लिखते हैं पल्ले तो पड़ता नहीं.. हिंदी की गल्तियों को पकड़ने पर ज्यादा ध्यान रहता है, वो काम भी ईमानदारी से नहीं करते। सीनियर ब्लागर की हां में हां मिलाते हैं। छोटों से कहते हैं कि दारू पीकर लेख लिखते हो.. ऐसे लोगों की बातों का क्या कहना..

      चलिए आप खुश रहिए... खुराफात आपको मुबारक हो..

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है। धन्यवाद।

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  13. मै भी इस शो को देखती हूँ !
    सहमत हूँ आपकी बातों से !

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  14. मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूँ , सच कहा आजकल हर शो सिर्फ पैसा कमाने में जूटा है उनको इससे कोई लेना देना नहीं की वो बच्चो को सही फैसला न सुनाकर कहीं उनको भ्रमित तो नहीं कर रहे ? वो तो बस वाह वाह करने में जुटे हैं और ऐसे २ अथकंडे अपनाते हैं जिससे उनके प्रोग्राम की टी . आर . पी बढती रहे | लेख अच्छा लगा |

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  15. Yeh show dekha nahin ..lekin yahan jo kuchh likha hai use padhkar yahi lgta hai ki Asha aur Runa ji ne Badi galati ki hai is Show ko join kar ke..,Is tarh ke show kisi bhi tarah se Acche taste mei ho hi nahin sakte....Sach kahaa hai ki ...Judges ki tu -tu main-main sunNe ke liye log deikha karte hain..

    Ye Reality shows ek dam standard ke show ho gaye hain

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  16. Yeh show dekha nahin ..lekin yahan jo kuchh likha hai use padhkar yahi lgta hai ki Asha aur Runa ji ne Badi galati ki hai is Show ko join kar ke..,Is tarh ke show kisi bhi tarah se Acche taste mei ho hi nahin sakte....Sach kahaa hai ki ...Judges ki tu -tu main-main sunNe ke liye log deikha karte hain..

    Ye Reality shows ek dam standard ke show ho gaye hain

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  17. जी मैं आपकी बात से सहमत हूं
    आशा जी ने कई बार ये बात कहाकि यहां मेरे फैसले पर सवाल उठाए जाते हैं, शायद मैं इसके काबिल नहीं..
    उन्हें नाराजगी में शो छोड़ देना चाहिए

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  18. इंडिया और पाकिस्तान ...हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है और जंग का भी ...चाहें वो किसी भी क्षेत्र से जुदा हुआ ही क्यों ना हो ......अब इस बार इसे नाम सुरक्षेत्र का दे दिया गया है .....एक मौका और लड़ने का ...बदसलूकी का ...

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  19. बहुत अच्छी बात उठाई है आपने, अपने स्वारथ के लिए चैनल और शो के निर्माता दोनों अंधे हो गए हैं और भारत और पाकिस्तान का बचा खुचा सद्भाव बिगाड़ रहे हैं जो कला संगीत ने बचा रखा है। अच्छी पोस्ट के लिए बधाई।

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  20. आपने सुर क्षेत्र के बारे में जो भी लिखा है, वह कम लिखा है। आपने इस शो की कुछ ही कमियां बताई हैं जबकि इस प्रोग्राम की तो जड़ ही नफरत के बीजो से बोई हुई है। आतिफ के चेहरे पर हर समय ऐसी नफरत दिखाई देती है की मन करता है कि उसका मुह तोड़ दूँ। सबसे बड़ी गलती आशा भोंसले और हिमेश की है। उन्हें इस तरह के प्रोग्राम में आना ही नहीं चाहिए। भारत सरकार इस प्रोग्राम को तुरंत बंद करवाए नहीं तो कभी भी देश में इस प्रोग्राम के कारण दंगे हो सकते हैं। यह हम भारतवासी ही हैं जो इतने सहनशील हैं। हमें अपने को बदलना चाहिए और पाकिस्तान से हर तरह के सम्बन्ध ख़त्म कर देने चाहियें। यह मुल्क जबसे बना है, भारत के विकास में बाधक ही बना हुआ है। कृपया अपनी लेखनी में थोडा तीखापन लाने की कृपा करें ताकि भारत की जागृत हो सके।

    चंदर अरोड़ा
    संपादक
    'पुलकित टाइम्स'
    सहारनपुर, उप्र - 247001

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    1. कुछ हद तक आपकी बात सही भी है..

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आपके विचारों का स्वागत है....