Sunday, 13 April 2014

राहुल का इंटरव्यू नहीं राष्ट्र के नाम संदेश !

हिंदी के दो बड़े न्यूज चैनलों ने कल कुछ बड़ा करने का दावा किया । वजह देश में हिंदी का नंबर एक चैनल होने का दावा करने वाले " आज तक " को  राहुल गांधी का इंटरव्यू मिल गया और बहुत लंबे समय तक नंबर एक रहे चैनल "इंडिया टीवी" को नरेन्द्र मोदी का इंटरव्यू मिला। राहुल ने इटरव्यू अपने घर के गार्डेन में दिया, जबकि मोदी चैनल के स्टूडियो पहुंचे थे। अब इंटरव्यू मिलने के बाद दोनों ही चैनल आपे से बाहर हो गए। इस इंटरव्यू को बेचने के लिए आज तक ने तो हद ही कर दी। चैनल पर कहा गया कि पिछले 10 साल का सबसे बड़ा इंटरव्यू.. वो भी हिंदी में। इंडिया टीवी ने इंटरव्यू के कुछ टुकडे 48 घंटे पहले दिखाना शुरू किया और बताता रहा कि पूरा इंटरव्यू शनिवार को रात में देखिए। वैसे हम कह सकते हैं कि इंडिया टीवी थोड़ा संयम में जरूर रहा। बहरहाल वीकेंड में आमतौर पर लोग न्यूज चैनल से दूर रहते हैं, लोग इस दिन इंटरटेनमेंट चैनल मसलन डांस इंडिया डांस, काँमेडी नाइट विद कपिल जैसे मनोरंजक प्रोग्राम ही देखना पसंद करते हैं, लेकिन इन दोनों चैनलों ने जिस तरह राहुल और नरेन्द्र मोदी की मार्केटिंग की, मैं भी मनोरंजक चैनलों के बजाए न्यूज चैनल पर ही बना रहा।

चलिए अब इनके इटरव्यू की बात कर ली जाए। जहां तक मुझे याद पिछले 10 सालों में आज तक चैनल पर इससे घटिया इंटरव्यू नहीं देखा होगा। आज तक में इंटरव्यू लेने के लिए इतने बड़े-बड़े चेहरे हैं, फिर उन्हें भोलू इंटर्न को भेजने की क्या जरूरत थी ? हो सकता है कि इंटर्न नाराज हो जाएं लिहाजा अब सिर्फ भोलू ही कहूंगा। देखिए बात शुरू हुई प्रधानमंत्री पद को लेकर। राहुल गांधी ने भोलू को समझाया कि हमारे यहां संविधान है, भोलू ने कहा, सही बात है.. संविधान तो है, राहुल ने पूछा.. संविधान में क्या लिखा है, जानते हैं..  आप लोग पढ़ते लिखते तो हैं नहीं, संविधान में लिखा है कि चुनाव के बाद सांसद प्रधानमंत्री का  चुनाव करेंगे । हम संविधान के हिसाब से चलते हैं.. बेचारा भोलू राहुल गांधी से डर गया और  ये भी नहीं पूछा कि 2004 में सांसदों ने तो सोनिया गांधी को चुनाव था, लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बन गए। ऐसा तो संविधान में कहीं नहीं लिखा है। पूरे 24 मिनट तक राहुल गांधी सरकारी योजनाएं ही भोलू को समझाते रहे और बेचारा भोलू चुपचाप सरकारी योजनाएं समझता रहा।

अब अगर इंटरव्यू की शर्तों में ये बात शामिल थी कि बीच में कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा, जो राहुल बोलेंगे उसे पूरा दिखाया जाएगा, इंटरव्यू लेने पुण्य प्रसून वाजपेयी, राहुल कंवल जैसे नामचीन एंकर को नहीं भेजा जाएगा। तब तो मुझे कुछ नहीं कहना है, लेकिन मैं एक बात जरूर कहूंगा कि ऐसे  में आज तक चैनल को ये बिल्कुल नहीं कहना चाहिए था कि पिछले 10 साल का सबसे बड़ा इंटरव्यू है। इसे राहुल का राष्ट्र के नाम संदेश कहते तो भी चल जाता। बहरहाल मैं दावे के साथ कह सकता है कि पिछले 10 साल में मैने आज तक चैनल पर इससे घटिया कोई भी इंटरव्यू नहीं देखा।
दूसरा इंटरव्यू इंडिया टीवी पर नरेन्द्र मोदी का था। रात 10 बजे शुरू हुआ ये इंटरव्यू लगभग दो घंटे यानि 12 बजे तक चलता रहा, मैने भी इस इंटरव्यू को पूरा देखा। वैसे मोदी का इंटरव्यू शुरू होते हैं कि सोशल साइट पर मोदी विरोधियों ने रजत शर्मा पर हमला बोल दिया। किसी ने इसे पेड कहा तो किसी ने फिक्स बताया। ऐसी प्रतिक्रिया आई तो मैं सोचने लगा कि आखिर ऐसा क्या है जो इस तरह की प्रतिक्रिया आ रही है। क्या जनता के मन  में कोई सवाल है जो रजत ने नहीं पूछा। मुझे लगता है कि जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल  गुजरात दंगा होगा, ये सवाल पूछा गया । अंबानी, अडानी, टाटा को दी गई जमीनों के बारे में भी सवाल पूछे गए। एक खास तपके की टोपी पहनने से इनकार कर दिया, ये सवाल भी पूछा गया, आडवाणी, जसवंत की नाराजगी पर भी सवाल पूछा गया, पिल्ला भी कार के नीचे आ जाए तो दुख होता है, ये सवाल भी पूछा गया, सुरक्षा, आर्थिक,  सामाजिक, विदेश नीतियों पर भी सवाल पूछे गए। हां हो सकता है कि कुछ लोग उनकी पत्नी के सवाल का इंतजार कर रहे हों कि आप अभी तक नामांकन पत्र में मैडम का नाम क्यों नहीं लिखते रहे ? इस बार क्यों शामिल किया ? रजत ने ये सवाल नहीं पूछा। लेकिन व्यक्तिगत रूप से मैं भी इस मत का हूं कि ये सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए, राजनीति को निजी जिंदगी से दूर  रखना चाहिए।

रजत से अगर कोई शिकायत हो सकती है तो ये हो सकती है कि आम तौर पर उनका जो तेवर रहता है, वो कहीं ना कहीं मीशिंग था । अब ये विवाद का विषय है कि मोदी के सामने उनके तेवर खुद ढीले पड़ गए या फिर उन्होंने जान बूझ कर तेवर के साथ समझौता किया ? कुछ लोगों की शिकायत थी कि स्टूडियो में लगातार मोदी-मोदी के नारे क्यों लग रहे थे। ये एक जायज सवाल है, लेकिन चुनाव का माहौल है, ऐसे में उत्साही समर्थक अगर ऐसा कर रहे थे, फिर तो मुझे कोई शिकायत नहीं है, लेकिन इंटरव्यू का माहौल बनाए रखने के लिए अगर ये प्रायोजित किया गया था तो निश्चित ही एक गलत परंपरा है। बहरहाल चुनाव का माहौल है, आरोप प्रत्यारोप का सामना करना ही होगा, लेकिन मुझे इंडिया टीवी और आज तक के इंटरव्यू पर कमेंट करना हो तो मैं आजतक के इंटरव्यू को वाकई फिक्स इंटरव्यू ही कहूंगा।




    

9 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड की ९५ वीं बरसी - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. शुभ संध्या
    एक सनीमा देखा था बरसों पहले
    नाम था.....
    नायक....
    उसमें भी एक..
    इन्टरव्यू था...
    वो सबसे..
    अच्छा इन्टरव्यू था
    पर आज वैसा
    क्यूँ नहीं हुआ
    सादर

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    1. हाहाहाहहाहाह.. इंटरव्यू तो वैसा हो सकता है,
      फिल्म वाले नेता को जितना बदमाश दिखाया
      गया था, उतने बदमाश अभी हमारे नेता नहीं है

      शुक्रिया

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  3. बहुत बढिया सही प्रस्तुति..

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (14-04-2014) के "रस्में निभाने के लिए हैं" (चर्चा मंच-1582) पर भी होगी!
    बैशाखी और अम्बेदकर जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सर प्रणाम,
      बहुत बहुत आभार

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  5. और उसी इंडिया टीवी के इंटरव्यू ने और चैनलों के लिए भी द्वार खोल दिये ! बहुत बढ़िया प्रस्तुति ! आज समय कम है , आगे फ़िर आपके विचार जरुर पढूंगा

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आपके विचारों का स्वागत है....